بدھ، 10 نومبر، 2021

Hindi editorial biswas October 31 by Dr. Syed Arif Murshed

 

प्रिय मित्रों !

आशा है आप सब लोग ठीक होंगे। कोरोना की तीसरी लहर का खतरा भी थमता नजर आ रहा है। जीवन की गाड़ी पटरी पर आती दिख रही है। काश ऐसा खैर, कोरोना की यह झूठी बीमारी दो साल से चल रही है। लेकिन क्या हमें पहले स्वास्थ्य की चिंता नहीं थी? । हमारे घरों में और हमारे परिवारों में बहुत सारी बीमारियाँ हैं। हर किसी को कोई न कोई रोग होता है। सिर दर्द जैसी छोटी-मोटी बीमारियों से लेकर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी हमारे परिवारों में जरूर पाई जाती है।

 

मेरे प्रिय मित्रों ! क्या आपने कभी सोचा है कि ये सब क्यों हो रहा है? अगर हम अपने पूर्वजों के जीवन पर नजर डालें तो हमें कोई बीमारी नहीं दिखती। कुछ वृध्द लोगों को छोड़कर, वो भी जो धूम्रपान करते थे उन्हें खांसी हुआ करती थी।, और उन्हें फेफड़ों की कुछ समस्याएं थीं जो घातक नहीं थीं। बस जितना हो सके खांसते रहते थे। और वे अंत तक खांसते रहते थे ।

 

किसी को भी कभी दिल का दौरा नहीं पढ़ता था और ना ही किसी को मधुमेह या बीपी हुआ करती थी। लेकिन पिछले तीन दशकों में जो हुआ है, वह यह है कि हर घर में, बूढ़ा या जवान, मधुमेह, बीपी, हृदय जैसी बीमारियों से पीड़ित लगता है। यदि हम अपने पूर्वजों के जीवन और उनकी जीवन शैली पर एक नज़र डालें, तो हम यह पाते हैं कि वे अपने अधिकांश जीवन के लिए आधुनिक उपकरणों पर निर्भर नहीं थे। उनका दैनिक जीवन बहुत ही सरल और सीधा साधा था। वे एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए पैदल या घोड़े की गाड़ी या बैलगाड़ी का प्रयोग करते थे।

 

घर में खाना बनाने के लिए मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग किया जाता था। पीसने के लिए खलबत्ता का परियोग किया जाता था। चाय का प्रयोग बिल्कुल ना के बराबर था। बहुत कम लोग चाय पीते थे जिसमें चीनी नहीं बल्कि गुढ़ का प्रयोग होता था। चाये की पत्ती की जगह अन्य सामग्री जैसे दालचीनी, इलायची, तेज पत्ते, लौंग, पुदीना, तुलसी और अन्य प्राकृतिक जड़ी बूटियों से बनाई जाती थी।

 

यदि हम चाहते हैं कि हमारा जीवन रोग मुक्त हो, तो हमें अतीत में वापस जाना चाहिए। और जो चीजें प्रगति के नाम पर हमारे जीवन से चली गई हैं, वे चीजें हमारे जीवन में यथासंभव वापस लाना चाहिए। तभी हम जीवन मैं स्वस्थ और रोग मुक्त रह सकते हैं।

 

डाक्टर सईद आरिफ

संपादक

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